Facebook or Fascistbook? Speak up for Dilip Mandal!

 

A couple of days ago, Facebook disabled the account of senior bahujan journalist and writer Dilip C. Mandal, without any explanation. Below is an English translation of the statement issued by Mr. Mandal through email, followed by the original note in Hindi.

Round Table India strongly condemns this fascist act by Facebook and demands that his account be reactivated immediately. Speak up for Dilip Mandal!  

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dilip mandal india today 1

I have no complaints against those who made a fake profile in my name and are writing stuff on it. All that is like juvenile behaviour, albeit of those who have just grown up physically. Those adults in diapers, who are making a mockery of the idea of discussion and debate – it is hard to be upset with such pathetic creatures. Their language reveals their true nature, which according to them is their sanskar, their values. Please forgive them. 

Those who nurse any doubts regarding me, I just want to tell them that if you still do not know what I can or cannot write, then that is your problem. I am not in the mood to help you out. But Facebook, whatever happened to you? It is possible that you probably received thousands of complaints saying that my account is fake. Perhaps there was even some campaign. But you have my ID, my phone number. You could have asked once, could have asked for any authorized documentary proof, you could have verified. But you disabled my account without asking anything. Why? Was it under pressure from the government or was it the RSS that complained? Or is this due to some grudge that some casteist staff member in your office might be holding against me? Did anyone's sentiments get hurt? Please do tell. What is there to be shy in this?

If anyone has a problem with what I wrote, if there is anyone who feels my comments were defamatory, or that they might disturb public peace and harmony; if anything I wrote violates some rule of the IPC, then there are enough legal provisions for anyone to utilise them to sue me.

But those running Facebook, particularly those sitting in their India office, should please explain that without any such complaint, what made them decide to disable my account?

Tell Facebook, why have you closed the account?

There is of course a simple way out, I could just open another account, but why should I resort to such stealthy means? This stealthy behavior - disabling my account in this underhand manner - is something that you have adopted. You should be ashamed. Now your tall claims that you are a platform for democratic and accessible ideas and opinions has been exposed as hypocrisy. Facebook, are you aware that the Indian Constitution ensures us freedom of thought and expression? Dear Facebook, you are driving on the wrong side. I hereby challan you.

~ Dilip Mandal

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फेसबुक की रॉंग साइड ड्राइविंग
 

उनसे कोई शिकायत नहीं है, जो मेरे नाम की नक़ली प्रोफ़ाइल बनाकर उस पर कुछ कुछ लिख रहे हैं। यह सब शरीर से बड़े हो चुके कुछ बच्चों का खेल है। डायपर पहनकर जो विरोध और विमर्श का तमाशा कर रहे हैं, उन बेचारों पर तो नाराज़ हो पाना भी मुश्किल है। उनकी भाषा उनका परिचय है, उनके हिसाब से उनका "संस्कार" है। प्लीज़, उन्हें माफ़ कर दीजिए।

जो लोग मेरे बारे में संदेह में हैं, उनसे सिर्फ यह कहना है कि अगर आपको अब भी नहीं मालूम कि मैं क्या लिख सकता हूँ और क्या नहीं, तो यह आपकी समस्या है। मैं आपकी मदद करने के मूड में नहीं हूँ।

लेकिन फेसबुक, तुम्हें क्या हो गया है? हो सकता है कि तुम्हें हजारों की संख्या में शिकायतें मिली होंगी कि मेरा एकाउंट फ़र्ज़ी है। चला होगा कोई कैंपेन। लेकिन तुम्हारे पास मेरी आईडी है, फ़ोन नंबर है। एक बार पूछ लेते। कोई सरकारी पहचान माँग लेते। वेरिफाई कर लेते। लेकिन तुमने बिना कुछ पूछे, एकाउंट डिसेबल कर दिया। क्यों? सरकार का दबाव था? या RSS की शिकायत थी? या आपके दफ़्तर के किसी जातिवादी स्टाफ़ की निजी खुन्दक है? किसी की भावना आहत हो गई है क्या? चलो बता भी दो। शर्माने की क्या बात है?

अगर मेरे लिखे से किसी को शिकायत है, किसी की मानहानि हुई है, शांति व्ववस्था को ख़तरा है, सौहार्द नष्ट हो रहा है, IPC की किसी धारा का उल्लंघन हुआ है, तो कानूनी व्वस्थाओं के तहत कार्रवाई का रास्ता सबके लिए खुला है। लेकिन फेसबुक चलाने वाले, खासकर उसके इंडिया ऑफ़िस में बैठे लोग, बताएँ कि ऐसी किसी शिकायत के बग़ैर, आपने एक एकाउंट को डिसेबल करने का फैसला क्यों किया?

कोई तो वजह होगी?

बताओ फेसबुक, क्यों बंद किया एकाउंट? वैसे तो रास्ता यह है कि मैं एक और एकाउंट खोल लूँ। लेकिन चोर दरवाज़े से मैं क्यों आऊँ? चोर दरवाज़े से, छिपकर एकाउंट बंद करने का काम तो तुमने किया है फेसबुक। शर्म आनी चाहिए। अब आपका यह क्लेम तो खंडित है कि आप विचारों और आइडिया के लिए एक सर्वसुलभ डेमोक्रेटिक मीडियम हैं।

फेसबुक,

 क्या आपको पता है कि भारतीय संविधान में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विधान है। आप रॉंग साइड में चल रहे हो फेसबुक महोदय। मैंने आपका चालान काट दिया है।

 

दिलीप मंडल

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