UP में गाय माता तो सुरक्षित है लेकिन दलित माताओं का क्या...?

 

शोभना स्मृति एवं कुलदीप कुमार बौद्ध 

shobanaभारत को आजाद हुए 70 साल बीत गए लेकिन हमारी दलित बहनों kuldeep 1को आजादी कब मिलेगी आखिर कब तब तक हमारी दलित महिलाये, जाति उत्पीडन की शिकार होती रहेंगी, आज हमारी बहाने अपने गावं गावं में प्रताड़ना को झेलते हुए जिस प्रकार से संघर्ष कर रही है किसी ने अपनी पति को खोया है किसी ने बहन ने दरिंदो की दरिंदगी को झेला है फिर भी बो आज न्याय की उम्मीद में संघर्ष कर रही है... ये सभी दलित पीड़ित महिलाओं का संघर्ष ही इस दलितं आन्दोलन के रीड की हड्डी है, जो की बाबा साहब के इस कारवां को आगे ले जाएगी l

 देश में दलित महिलाओं के स्वाभिमान के लिए संघर्षरत आल इण्डिया दलित महिला अधिकार मंच ने UP में अभी हाल ही चुनाव के बाद से लगातार जिस प्रकार से दलित महिला उत्पीडन की घटनाएँ हुईं है उन पर फेक्ट फाइंडिंग व अध्धयन के बाद उ.प्र. के अलग अलग जिलों में लगातार हो रही दलित महिला उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर दलित महिला पीड़ितों के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम की जिसमे प्रथम दिन दलित महिला पीड़ितों के साथ खासकर लैंगिग्क शोषण की शिकार व मानसिक प्रताड़ना को कम कर अपने स्वयं के आत्मविश्वास को मजबूत कर पुन: एक नई जिन्दगी जीने की प्रकिया हुई| बॉडी मेपिंग सत्र किया गया जिसमे सबसे ज्यादा लैंगिक शोषण की बात सामने आई l राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े भी बताते है की लगातार दलित महिला उत्पीडन की घटनाये बढ़ रही है हर दिन 6 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाये बताई जाति है लेकिन हकीकत कुछ और है, इससे भी कही ज्यादा घटनाये हो रही है, ये जो भी आंकड़े प्रस्तुत किये जाते है वो वही आंकड़े है जो की रजिस्टर्ड होते बहुत सी घटनाये तो रजिस्टर्ड ही नहीं होती है l

 आज जिस प्रकार से जाति का महायुद्ध हो रहा है उसकी शिकार दलित महिलाये ही होती है और उनके शरीर को इसकी रणभूमि बनाया जाता है, आज जो भी दलित महिला लीडर आगे आकर अपनी आवाज को उठाने की कोशिश करती है सबसे पहले उन्हें ही शिकार बनाया जाता है l

 लखनऊ में 15 दलित महिला उत्पीड़न के केसों पर दलित महिला पीड़ितों के साथ 4 सदस्यीय जूरी/पैनल ( जस्टिस खेमकरण जी, रेनू मिश्रा-आली, ताहिरा हसन व आशा कोताल ) ने सुनवाई की जिसमे दलित महिला पीड़ितों ने अपने संघर्ष की कहानी को रखा, जिसमे 15 जघन्य मामले जैसे नाबालिग लडकियों के बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, छेड़खानी, हत्या, जबरजस्ती, बदसलूकी आदि जैसे मामलों की सुनवाई की गयी जिसमे पीडित महिलायों द्वारा अपनी कहानी अपनी जुबानी के माध्यम से बताया गया कि किस तरह उनको पीड़ित किया जाता है उनके साथ बारदात को किस तरह अंजाम दिया जाता है, घटना के बाद थानाध्यक्ष या उच्चधिकारियों द्वारा न तो FIR लिखी जाति है और न ही कोई कार्यवाही की जाति है जबकि कभी कभी FIR दर्ज हो जाती है तो भी नया संशोधन अधिनयम का पालन नहीं किया जाता है और विबेचक द्वारा सही समय (60 दिन) पर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है. जबकि अनुसूचित जाति/ जनजाति अधिनियम 1989 व संसोधन 2015 में सम्पूर्ण कार्यवाही के बारे में प्रिविजन किया गया है और पीड़ित महिला को अधिनियम में दिए गए मुआवजा का भी प्रोविजन किया गया है लेकिन पीड़ित महिलाओं को अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्यवाही की गयी. ये बात बहुत ही चिंता जनक है की पुरे प्रदेश में कानून ब्यवस्था विफल हो गई है l आज घ्रणायुक्त वर्ण ब्यस्था पूरी तरह से सभी जगह हावी हो गई है जो बहुत ही चिंताजनक स्तिथि पैदा कर रहा है

UP - बुंदेलखंड में दलित महिलाओं पर लगातर गंभीर घटनाये हो रही है, आज हालत यह है की गाय माता तो सुरक्षित है लेकिन हमारी दलित माँ बहनों की सुरक्षा की चिंता किसी को नहीं है, क्या अब फिर से बुंदेलखंड में किसी बहन को फूलन बनना पड़ेगा?
दलित महिला पीड़ितों ने अपने संघर्षों को लेकर – अपनी कहानी अपनी जुवानी के माध्यम से प्रेस क्लब लखनऊ में प्रेस बार्ता की, जिसमे दलित महिला पीड़ित- सुमन(कानपूर),श्याम कुमारी(घाटमपुर)गीतांजली(बुंदेलखंड),पूनम(पूर्वांचल) सभी परिवर्तित नाम ये सभी दलित महिला पीड़ितों ने अपनी दर्द भरी दास्ताँ सुनते हुए कहा की आखिर हम दलित महिला पीड़ितों को कोन न्याय दिलाएगा, मेरी कोई नहीं सुनता है, क्या हम लोग इस देश में नहीं रहते? क्या मेरे लिए कानून नहीं बना है? और यदि बना भी है तो हमें न्याय क्यों नहीं मिल रहाl

 आज जिस तरह के भयावह हालातों से हमारी बहनों को गुजरना पढ़ रहा है, आये दिन हमारी बहनों के साथ शोषण व अत्याचार हो रहा है और सब चुप्पी साधे बैठे है,उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से न्याय बयाबस्था बिफल हो चुकी है l आल इण्डिया दलित महिला अधिकार मंच इन सभी केसों को संयुक्त राष्ट्र संघ में जून में रखेंगे, और इन महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए मंच लगातार संघर्ष करेगा l

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Shobhana Smriti is a courageous Dalit woman leader who has been associated with the movement for more than a decade. She is currently pursuing her law degree as she continues to support survivors of heinous caste crimes. Her leadership reflects strength and compassion. She currently leads the All India Dalit Mahila Adhikar Manch – UP.

BDAM/AIDMAM- संयोजक, मो- 9415935558/This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.  फेसबुक-shobhana mashaal; Twitter @smritishobhana4

Kuldeep Kumar Baudh is a young and dynamic Dalit activist from UP- Bundelkhand. He brings new hope into the ideology of Babasaheb Ambedkar through his relentless struggle for justice with the communities. He is a post graduate is Social Work from Bundelkhand University. He currently leads the Bundelkhand Dalit Adhikar Manch (BDAM). AIDMAM-राज्य समन्वयक मो- 9453645931/This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.  ट्विटर - @kuldeepbaudh; Facebook –kuldeep kumar baudh

 

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